दूसरे पक्ष ने किया का दावा- भूमि घोटालों का आरोपित है शिवरतन भरतिया आरोप ये भी – चल रहे हैं सम्पत्ति विवाद के अनेक मामले

दूसरे पक्ष ने किया का दावा- भूमि घोटालों का आरोपित है शिवरतन भरतिया आरोप ये भी – चल रहे हैं सम्पत्ति विवाद के अनेक मामले 

श्रीगंगानगर दावा करने वाले शिवरतन भरतिया आज तक इस सम्पत्ति के मालिकाना हक का एक भी कागज नहीं दिखा पाया । इतना ही नहीं , उसके जन्म और पिता को लेकर ही इतना संशय है कि उसके किसी भी दावे पर यकीन करना नामुमकिन है । ” पुरानी धानमंडी में स्थित एक सम्पत्ति पर मालिकाना हक जता रहा शिवरतन भरतिया कई भूमि घोटालों का आरोपित है । यह कहना है निशित अग्रवाल का , जिन पर झूठा पट्टा बनाकर सम्पति हड़पने का आरोप शिवरतन भरतिया ने लगाया है । इस सम्बन्ध में बकायदा प्रेस नोट जारी किया है । प्रेस नोट में जानकारी देते हुए बताया गया कि ” बाप की मौत के बाद पैदा होने का दावा करने वाला यह शख्स झूठे दस्तावेजात के आधार पर दूसरों निशिात ने दावा किया ” दरअसल , चिमनलाल भरतिया ने अपनी एक निजी ट्रस्ट बनाकर अपनी छह पुत्रियों और एक भतीजे हीरालाल भरतिया को ट्रस्टी बनाया था । हीरालाल भरतिया अस्वस्थ थे । उनकी धर्मपती और उनकी कोई संतान उनकी 1953 में हुई शिवरतन भरतिया का दावा है कि जब उसके पिता की मृत्यु हुई , तब उसकी माता गर्भधारण कर चुकी थी और पिता की मृत्यु के आठ महीने बाद उसका जन्म हुआ । शिवरतन ने इसका एक झूठा जन्म प्रमाण पत्र भी पश्चिम बंगाल से बनवाया हुआ है । पश्चिम बंगाल की ही एक ट्रस्ट में बाकी सदस्यों को रिटायर दिखाकर उसका स्वयंभू कर्त्ता – धर्ता बनकर इसकी आड़ में भूमि घोटाले कर रहे शिवरतन भरतिया ने ताजा तीर चिमनलाल भरतिया की पूर्व में बेचान की हुई एक सम्पत्ति के लिए मारा है , जिसके लिए वह सम्पत्ति मालिक को पिछले दुकान को लेकर रखा पक्ष की सम्पत्तियों को अनावश्यक रूप से विवादित बना देने में माहिर है । इसके खिलाफ चुरू और श्रीगंगानगर में पहले से ही सम्पत्ति विवाद के मामले चल रहे हैं । पश्चिम बंगाल की एक ट्रस्ट की आड़ में यह आदमी राजस्थान में लगातार धोखाधड़ी करता आ रहा है । किसी की सम्पत्ति के झूठे कागजात बनाकर बेच दिए तो किसी की सम्पत्ति की झूठी शिकायतें देकर उस पर दबाव बनाना इसका पेशा है । ”

 

श्रीगंगानगर: पुरानी धानमंडी स्थित दुकान नंबर 101 को सांठ – गांठ कर गैर कानूनी तरीके से पट्टा जारी करवाने के लिए मामले में दुकान के मालिक ने अपना पक्ष रखा है । दुकान मालिक शिवरतन भरतिया ने आज प्रैस कांफ्रेंस करके स्पष्ट किया कि उक्त दुकान का वे एकमात्र मालिक है । भरतिया ने बताया कि दादा चिमनलाल के नाम बीकानेर स्टेट का पट्टा बना हुआ है । दादा के निधन हो जाने के बाद वे ही एकमात्र वारिस हैं । शिवरतन के अनुसार उन्हें पता चला कि किराएदार फर्म बालकिशन ओमप्रकाश के पड़पोते निशित अग्रवाल ने अपने नाम से पट्टा बनवा लिया । इस संबंध में कोतवाली थाना में उनके द्वारा मुकदमा भी दर्ज करवाया जा चुका है । के निशित अग्रवाल के मुताबिक ” हाल ही में कोतवाली पुलिस थाना में दर्ज करवाए गए मुकदमे में शिवरतन भरतिया ने एक सम्पत्ति पर मालिकाना हक जताते हुए नगर परिषद् पर गलत पट्टा बनाने का आरोप लगाया है , जबकि वास्तिवक रूप से उसका इस सम्पत्ति से कोई लेना – देना नहीं है । यह सम्पत्ति चिमनलाल भरतिया नामक एक व्यक्ति द्वारा अपने जीवनकाल में बेचान कर दी गई थी , जिसके सभी दस्तावेजात खरीददार के पास उपलब्ध हैं । लेकिन इस सम्पत्ति का मालिक होने का मृत्यु तक अस्तित्व में नहीं थी । चिमनलाल भरतिया यह तथ्य अच्छी तरह जानते थे और 1961 में अपनी मृत्यु से पूर्व तक उन्होंने हीरालाल के उत्तराधिकारी के रूप में अपनी ट्रस्ट में किसी का नाम सम्मिलित नहीं करवाया था । इस ट्रस्ट के बारे में जानकारी मिलने पर कहीं से एक अनजान शख्स अचानक से शिवरतन भरतिया बनकर सामने आ गया और खुद को हीरालाल भरतिया का पुत्र बताने लगा । काफी समय से मानसिक रूप से परेशान कर रहा था । यह विवाद नहीं पैदा करने की एवज में शिवरतन ने 50 लाख रुपए की मांग भी की , जिसकी शिकायत पुलिस थाना कोतवाली में दर्ज है । इस व्यक्ति के खिलाफ एक विस्तृत उच्चस्तरीय जांच की मांग का पत्र भी उच्च स्तर पर भेजा गया है , ताकि इसका पर्दाफाश कर आमजन को इसके भूमि घोटालों से बचाया जा सके । “

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