लेखन एक निजी संवेदना है, हमारे व्याप्त मानसिक ऊहापोह और सामाजिक सूक्ष्मता का प्रत्यक्ष प्रमाण, जो हम शब्दिक रूप में प्रस्तुत करते हैं … और आज हम बात कर रहे हैं उनकी जिन्होंने भावों को शब्दों में पिरोने का काम करती हैं – तनुश्री

तनुश्री का जन्म 7 अक्टूबर 1999 को श्रीनगर में हुआ । बचपन नानी के प्रेम में गुजरा , सामान्य पर लगावपूर्ण रहा । उन्हें किसी को कुछ बोल के समझाने में असहजता महसूस होती थी , यही कारण रही उनको लेखन के क्षेत्र में लाने का । स्कूल के दिनों में ही हिंदी साहित्य के प्रति रुझान तथा आकर्षण महसूस हुआ और हिंदी साहित्य पढ़ना जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया ।

तनु श्री अभी भोपाल में रहती हैं और कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हैं ।
इस कविता संग्रह के अलावा वो और दो काव्यसंग्रह की सह लेखिका रह चुकी हैं । पर जल्दी है उनकी पहली कविताओं का संकलन प्रकाशित होने वाला है – फिर तुम्हें मैंने चाँद कहा ।

अपने कविता संग्रह – फिर तुम्हें मैंने चाँद कहा के बारे में तनु कहती है कि “फिर तुम्हें मैंने चाँद कहा ” – मेरी पहली काव्य संग्रह जहाँ मैंने एक बेहद सूक्ष्म पर उतना ही ज्यादा मजबूत मन के भाव , जीवन का अंश और आत्मीय गुण – “प्रेम” को लिखा है । प्रेम लिखने के लिए प्रेम का होना या करना जरूरी नहीं है , बस प्रेम को परिष्कृत कर हृदय में पालना पड़ता है । प्रेम एक अपेक्षाकृत , निःस्वार्थ और विशिष्ट अनुभव है जो हम जन्म से पहले से माँ के गर्भ में अनुभव करते हैं और मृत्यु के बाद भी हमारे अपनों के स्मृतियों में जीवित रहते हैं ।

यह काव्य संग्रह एक लिफाफे सा है जिसके अंदर बहुत सी कविताएँ खत के रूप में । प्रत्येक कविता किसी ना किसी को संबोधित करती है । मैंने जो भी अनुभव किया, कभी किसी प्रेमी जोड़े को पार्क में बैठे देख या नानी की कहानियों में , मीरा का समर्पण पढ़ के और चकोर या चातक पक्षी के बारे में सोच के; मेरे अंदर प्रेम की एक छवि बनी । जिसे मैं समय-समय पे कागज पर उतारने की कोशिश करती रही ।

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